NEET विवाद के बाद सरकार लाई संशोधन विधेयक, विपक्ष और सत्ता पक्ष में आमने-सामने की बहस
विधेयक की पृष्ठभूमि
देश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं के बीच सरकार ने लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया है। यह विधेयक 2024 में बने मूल कानून को और सख्त बनाता है। इसकी पृष्ठभूमि में मई 2026 का वह विवाद है, जब कथित पेपर लीक के आरोपों के बाद NEET 2026 परीक्षा रद्द कर अगले महीने दोबारा कराई गई थी। इसी घटना ने सरकार को संशोधन लाने पर मजबूर किया।
सदन में क्या हुआ
लोकसभा में विधेयक पर हुई बहस काफी गरमागरम रही। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक का बचाव करते हुए विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने 2009 और उससे पहले के कई कथित पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यह समस्या मौजूदा सरकार से पहले की है। उन्होंने 2017 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की स्थापना और परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए एक समर्पित कानूनी ढांचा बनाने को सरकार की उपलब्धि बताया।
विपक्ष ने पलटकर सवाल उठाया कि जब पहले भी कानून मौजूद थे, तो लीक क्यों नहीं रुके — यानी असली मुद्दा कानून का न होना नहीं, बल्कि उसका सख्ती से पालन न होना है।
विधेयक में क्या नया है
संसदीय शोध संस्था PRS Legislative Research के अनुसार, संशोधन विधेयक का मकसद पेपर लीक और परीक्षाओं में संगठित धांधली के मामलों में और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करना है। मूल कानून में पहले से ही ऐसे अपराधों के लिए जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है; संशोधन इन प्रावधानों को और मज़बूत करने की दिशा में है।
क्यों मायने रखता है
देश में हर साल करोड़ों छात्र सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए परीक्षाएं देते हैं। एक भी लीक लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फेर देता है और परीक्षा प्रणाली पर भरोसा हिला देता है। यही वजह है कि यह विधेयक सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा भावनात्मक मुद्दा है। असली परीक्षा अब कानून बनने के बाद उसके ज़मीनी अमल की होगी।
स्रोत: बिज़नेस टुडे, PRS Legislative Research, न्यूज़ ऑन एयर



