28,000 से ज़्यादा जगहों से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवाओं के साथ शुरू हुआ 100 हफ़्ते का जन-भागीदारी अभियान — पर पिछली कोशिशों से यह कितना अलग है?
क्या शुरू हुआ और कैसे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान” की शुरुआत की। प्रधानमंत्री कार्यालय की सूचना के अनुसार, इस अभियान का मक़सद युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें अपने समुदाय में सकारात्मक सामाजिक बदलाव का वाहक बनाना है।
लॉन्च के मौक़े पर प्रधानमंत्री ने देशभर की 28,000 से अधिक जगहों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए जुड़े एक करोड़ से ज़्यादा युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश का युवा स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त रहेगा।
100 हफ़्ते, हर रविवार — ढाँचा क्या है
यह अभियान 100 सप्ताह तक चलने वाला राष्ट्रव्यापी जन-भागीदारी कार्यक्रम है। इसकी सबसे ठोस बात इसका साप्ताहिक ढाँचा है: हर रविवार को देशभर में जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। इनमें खेल आयोजन, वॉकाथॉन, ध्यान सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक, चर्चा मंच, कला प्रतियोगिताएँ और सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रम शामिल हैं।
अभियान में MY भारत के स्वयंसेवक, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), युवा क्लब, ग़ैर-सरकारी संगठन, उद्योग संगठनों की युवा इकाइयाँ और 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन जोड़े गए हैं। यानी सरकारी तंत्र के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक संगठनों को भी इसमें शामिल किया गया है।
“अमृत पीढ़ी” और Gen Z पर ज़ोर
प्रधानमंत्री ने युवाओं को “अमृत पीढ़ी” बताते हुए कहा कि यही पीढ़ी 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाएगी। भाषा और मंच दोनों के स्तर पर इस अभियान में जनरेशन Z को केंद्र में रखने की कोशिश साफ़ दिखती है — वीडियो कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया आधारित संकल्प और खेल-सांस्कृतिक गतिविधियाँ इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
यह ध्यान देने लायक़ है कि सरकार ने इसे “नशा-विरोधी अभियान” से आगे बढ़ाकर “विकसित भारत” के लक्ष्य से जोड़ा है। यानी नशामुक्ति को स्वास्थ्य का मुद्दा भर नहीं, बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय क्षमता का मुद्दा बताया जा रहा है।
2020 के “नशा मुक्त भारत अभियान” से यह अलग कैसे
यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने नशे के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया हो। अगस्त 2020 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने “नशा मुक्त भारत अभियान” शुरू किया था, जिसमें देश के सबसे संवेदनशील ज़िलों को चिह्नित कर काम किया गया। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 2024 तक 11 करोड़ से ज़्यादा लोग उस अभियान से जुड़ चुके थे।
नया अभियान दो मायनों में अलग दिखता है। पहला, इसका फ़ोकस विशेष रूप से युवाओं पर है, न कि सामान्य आबादी पर। दूसरा, इसमें एक तय समय-सीमा (100 सप्ताह) और एक तय आवृत्ति (हर रविवार) है। किसी जन-अभियान में सबसे बड़ी चुनौती लॉन्च के बाद की निरंतरता होती है, और साप्ताहिक कैलेंडर उसी समस्या का जवाब देने की कोशिश जान पड़ता है।
असली परीक्षा किस बात की होगी
जागरूकता अभियान अपनी जगह ज़रूरी हैं, लेकिन नशे की समस्या का दूसरा सिरा इलाज और पुनर्वास का ढाँचा है। नशामुक्ति केंद्रों की उपलब्धता, प्रशिक्षित काउंसलर, ओपिओइड प्रतिस्थापन चिकित्सा जैसी सेवाएँ और परिवारों को मिलने वाला सहयोग — ये ऐसी चीज़ें हैं जो रैली या वॉकाथॉन से नहीं बनतीं।
इसलिए इस अभियान की असली कसौटी दो सवालों पर होगी। पहला, क्या हर रविवार की गतिविधियाँ पहले कुछ महीनों के बाद भी उसी पैमाने पर चलती रहेंगी? और दूसरा, क्या जागरूकता से आगे बढ़कर ज़मीन पर इलाज और पुनर्वास की क्षमता भी बढ़ेगी? इन दोनों सवालों के जवाब आने वाले महीनों में ही मिलेंगे।
स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMIndia), इंडिया टीवी न्यूज़, द वीक, आकाशवाणी न्यूज़



