संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर FTA वार्ता के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने की मांग की है। इस विश्लेषण में समझिए विवाद के असली आंकड़े, दूध से लेकर बीज तक की चिंताएं, और यह बहस क्यों सिर्फ़ खेती की नहीं है।
21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर “देश बचाओ मोर्चा” के बैनर तले किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया। मांग एक थी — भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत रद्द की जाए। पंजाब और अन्य राज्यों से 20 जुलाई को दिल्ली की ओर बढ़े काफ़िले कई सीमा-बिंदुओं पर रोक लिए गए, फिर भी कुछ प्रदर्शनकारी किसान घाट पहुंचे।
डाउन टू अर्थ के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के प्रवक्ता तेजवीर सिंह ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर, पंजाब में जाकर बैरिकेड लगाए।
विरोध का केंद्र: पैमाने का अंतर
यह बहस भावनाओं की नहीं, संरचना की है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे खुले पत्र में जो तुलना रखी है, वही इस विवाद की जड़ है:
| अमेरिका | भारत | |
|---|---|---|
| किसान / जोत | लगभग 18.8 लाख किसान | 14.65 करोड़ कृषि जोतें |
| कार्यबल का हिस्सा | लगभग 2% | लगभग 48% |
| औसत खेत का आकार | 469 एकड़ | लगभग 2.67 एकड़ |
SKM का कहना है कि भारत के 86 प्रतिशत किसानों के पास पांच एकड़ से कम ज़मीन है। यानी दोनों देशों के किसान एक ही बाज़ार में उतरेंगे, पर उनकी लागत, पैमाना और सौदेबाज़ी की ताकत बिल्कुल अलग है।
चिंता क्या है: सस्ता आयात
मोर्चे का तर्क है कि ऐसे समझौतों से भारी सब्सिडी वाले कृषि और प्रसंस्कृत उत्पादों का आयात बढ़ सकता है, जिससे करोड़ों छोटे और मझोले किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। पत्र में कहा गया है कि यूरोपीय संघ और अमेरिका अपने किसानों को बड़ी सब्सिडी देते हैं, जिससे भारतीय उत्पादकों के लिए मुक़ाबला असमान हो जाता है।
SKM के अनुसार भारत ने कई उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने पर सहमति दी है या उससे ऐसा करने को कहा जा रहा है — जैतून का तेल, मार्जरीन, कुछ वनस्पति तेल, फलों के रस, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और भेड़ का मांस। शराब, बीयर, कीवी, नाशपाती और मांस उत्पादों पर शुल्क कटौती की आशंका भी जताई गई है। डेयरी उत्पादों का सस्ता आयात घरेलू कीमतों को नीचे खींच सकता है — और भारत में दुग्ध उत्पादन बड़े पैमाने पर छोटे पशुपालकों के हाथ में है।
सिर्फ़ खेती का मामला नहीं
बीज पर अधिकार
SKM ने बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से जुड़े प्रावधानों पर भी चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि प्रस्तावित प्रावधान किसानों के बीज बचाने, आपस में बदलने और दोबारा इस्तेमाल करने के पारंपरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। भारतीय खेती में यह प्रथा सदियों पुरानी है और बीज की लागत सीधे इससे जुड़ी है।
सस्ती दवाइयां
पत्र में यह चेतावनी भी है कि दवा क्षेत्र में पेटेंट अवधि बढ़ने और डेटा एक्सक्लूसिविटी से सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। भारत दुनिया का बड़ा जेनेरिक दवा आपूर्तिकर्ता है, इसलिए यह मुद्दा किसानों से कहीं आगे तक जाता है।
MSME और रोज़गार
मोर्चे का कहना है कि मशीनरी, विद्युत उपकरण, रसायन, इस्पात, फार्मास्युटिकल्स और मोटर वाहन जैसे क्षेत्रों में आयात शुल्क घटने से घरेलू उद्योग और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों (MSME) को नुकसान हो सकता है, जिसका असर रोज़गार पर पड़ेगा।
असली मांग: पारदर्शिता
गौर करने वाली बात यह है कि SKM की मुख्य मांग समझौते को खारिज करने भर की नहीं है। संगठन ने राष्ट्रपति से कहा है कि वार्ता से जुड़े सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएं और समझौतों पर संसद में चर्चा हो। पत्र में आरोप है कि ये समझौते कॉर्पोरेट दबाव में और पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श के बिना आगे बढ़ाए जा रहे हैं।
यह अमेरिका तक सीमित नहीं है — SKM ने यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और न्यूज़ीलैंड के साथ हुए या प्रस्तावित समझौतों का भी विरोध किया है।
आगे क्या
मोर्चे ने 22 जुलाई को देशभर में “FTA विरोधी किसान संकल्प दिवस” मनाने की घोषणा की थी, जिसमें गांवों में किसानों ने समझौतों के खिलाफ संकल्प लिए और आंदोलन की आगे की दिशा पर चर्चा की। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार इन समझौतों से पीछे नहीं हटती, तो किसान और मज़दूर संगठन अभियान तेज़ करेंगे।
क्यों मायने रखता है
व्यापार समझौतों की बहस आमतौर पर टैरिफ की तकनीकी भाषा में होती है, जो आम पाठक तक नहीं पहुंचती। लेकिन इसका सीधा असर दूध के दाम, बीज की लागत, दवा की कीमत और छोटे कारखानों के रोज़गार पर पड़ सकता है। सरकार का पक्ष है कि समझौते भारत के हित में हैं और किसानों के हितों की रक्षा की जाएगी; किसान संगठनों की मांग है कि यह भरोसा दस्तावेज़ों और संसदीय बहस से साबित हो। असली सवाल यही है — बातचीत की मेज़ पर क्या तय हो रहा है, यह देश को कब और कितना पता चलेगा।



