एक ‘गेस पेपर’, एक रद्द परीक्षा और लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर — NEET-UG 2026 पेपर लीक सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि भारत की परीक्षा प्रणाली में गहराते भरोसे के संकट की कहानी है। एक विश्लेषण।

एक ‘गेस पेपर’ जिसने पूरी परीक्षा हिला दी
मई 2026 में जब 20 लाख से ज्यादा छात्र NEET-UG परीक्षा में बैठे, तो शायद ही किसी ने सोचा था कि कुछ ही दिनों में यह परीक्षा देश की सबसे बड़ी विवादित परीक्षाओं में गिनी जाएगी। परीक्षा के बाद रिपोर्टें सामने आईं कि परीक्षा से पहले एक ‘गेस पेपर’ प्रचलन में था, जिसमें बड़ी संख्या में सवाल थे। जांच में सामने आया कि इनमें से करीब 120 सवाल असल पेपर के लगभग 4,101 सवालों से हूबहू मेल खाते थे। यही आंकड़ा पूरे मामले की गंभीरता को बयां करता है।
जांच, गिरफ्तारी और परीक्षा रद्द
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा कराई गई इस परीक्षा की साख पर सवाल उठने के बाद शिक्षा मंत्रालय की लिखित शिकायत पर CBI ने 12 मई 2026 को मामला दर्ज किया। जांच में पता चला कि NTA द्वारा विशेषज्ञ के तौर पर नियुक्त एक भौतिकी (फिजिक्स) प्राध्यापक, जिनके पास पेपर तक पूरी पहुंच थी, ने कुछ सवाल एक अन्य आरोपी के साथ साझा किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए NTA ने परीक्षा रद्द कर दी, दोबारा परीक्षा की घोषणा की और छात्रों के पंजीकरण को बरकरार रखते हुए अतिरिक्त शुल्क माफ कर दिया।
टाइमलाइन: कैसे आगे बढ़ा मामला
- मई 2026: 20 लाख से अधिक छात्रों ने NEET-UG दी; कुछ ही दिनों में लीक के आरोप सामने आए।
- 12 मई 2026: शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर CBI ने केस दर्ज किया।
- जांच के दौरान: ‘गेस पेपर’ और असल पेपर में करीब 120 सवालों का मिलान; NTA विशेषज्ञ की भूमिका उजागर।
- इसके बाद: परीक्षा रद्द, दोबारा परीक्षा की घोषणा।
- 28 जून 2026: कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।
- जुलाई 2026: जंतर-मंतर पर आंदोलन तेज; मामला संसद के मॉनसून सत्र तक पहुंचा।
कानून क्या कहता है
आरोपियों पर लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश शामिल हैं। इस कानून के तहत प्रवेश परीक्षाओं में नकल गैर-जमानती अपराध है, जिसमें तीन से पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
असली सवाल: बार-बार क्यों?
यह पहली बार नहीं है जब NTA सवालों के घेरे में है। एजेंसी पर पहले भी पेपर लीक, नकल, हैकिंग, अनियमित स्कोरिंग और परीक्षा सुरक्षा में चूक के आरोप लगते रहे हैं। बार-बार दोहराई जाने वाली इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है — क्या समस्या किसी एक परीक्षा की है, या पूरी व्यवस्था की?
भरोसे का संकट
जब लाखों छात्र सालों की मेहनत के बाद एक परीक्षा में बैठते हैं, तो उनका पूरा भविष्य उस व्यवस्था की ईमानदारी पर टिका होता है। हर लीक न सिर्फ ईमानदार छात्रों के साथ अन्याय है, बल्कि पूरी प्रणाली पर से भरोसा भी कमजोर करता है।
आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा तंत्र की साख बहाल करने के लिए तीन स्तरों पर काम जरूरी है — मजबूत कानूनी सुरक्षा-कवच, तकनीकी सुधार (जैसे सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण और डिजिटल ट्रैकिंग) और पारदर्शी प्रशासन। जब तक व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक सड़कों पर उतरे छात्रों का गुस्सा और भरोसे का यह संकट यूं ही बना रहेगा।
स्रोत: दृष्टि IAS, आउटलुक इंडिया, विकिपीडिया


