राष्ट्रमंडल खेलों का कार्यक्रम छोटा होने के बावजूद भारत ने 13 स्वर्ण जीते, मुक्केबाजी में सात गोल्ड का ऐसा रिकॉर्ड बना जो किसी देश ने आज तक नहीं बनाया, और समापन समारोह में 2030 की मेज़बानी अहमदाबाद को सौंपी गई।
राष्ट्रमंडल खेल 2026 का पर्दा रविवार को ग्लासगो के हाइड्रो एरिना में गिर गया। 23 जुलाई से 2 अगस्त तक चले इन खेलों में भारत ने कुल 39 पदक जीते — 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य। यह आंकड़ा अपने आप में जितना अहम है, उससे कहीं ज़्यादा अहम वह संदर्भ है जिसमें यह हासिल हुआ।
पदक कम, लेकिन तुलना बेमानी क्यों है
ग्लासगो संस्करण को लेकर सबसे बड़ी बहस खेलों की संख्या को लेकर रही। 2022 बर्मिंघम के मुकाबले इस बार कार्यक्रम काफी छोटा कर दिया गया था और भारत के कई पारंपरिक “पदक-गढ़” कार्यक्रम में जगह नहीं बना पाए। यानी 39 पदकों की सीधी तुलना पिछले संस्करणों से करना आंकड़ों के साथ नाइंसाफी होगी। असली कहानी यह है कि जिन खेलों में भारत उतरा, उनमें उसका स्ट्राइक-रेट कैसा रहा।
मुक्केबाजी: वह रिकॉर्ड जो अब तक कोई देश नहीं बना सका
भारतीय मुक्केबाजी का यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रमंडल अभियान रहा। रिंग से भारत को 10 पदक मिले — सात स्वर्ण और तीन रजत। ओलंपिक्स डॉट कॉम के अनुसार राष्ट्रमंडल खेलों के किसी एक संस्करण में मुक्केबाजी के सात स्वर्ण आज तक किसी देश ने नहीं जीते। इससे पहले इंग्लैंड ने दो बार (लंदन 1934 और गोल्ड कोस्ट 2018) और कनाडा ने एक बार (एडिनबर्ग 1986) छह-छह स्वर्ण जीते थे।
स्वर्ण जीतने वालों में साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा), प्रिया घनघस (60 किग्रा) और अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) महिला वर्ग से रहीं, जबकि पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) शीर्ष पर पहुंचे। जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल को रजत से संतोष करना पड़ा।
गौर करने वाली बात यह है कि सात में से पांच स्वर्ण महिला मुक्केबाजों के नाम रहे।
जूडो में पहली बार, भारोत्तोलन में हैट्रिक
भारतीय जूडो के लिए यह संस्करण ऐतिहासिक रहा। अस्मिता डे और हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय जूडोका बने। यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य जोड़ा।
भारोत्तोलन में मीराबाई चानू ने ग्लासगो में भारत का पहला स्वर्ण दिलाया और इसके साथ ही राष्ट्रमंडल खिताबों की हैट्रिक पूरी की।
एथलेटिक्स में भारत ने 10 पदक जीते — पांच रजत और पांच कांस्य। समेकित कार्यक्रम के तहत पैरा-एथलेटिक्स दल ने छह पदक जोड़े, जिनमें तीन स्वर्ण शामिल थे। नीरज चोपड़ा को इस बार रजत से संतोष करना पड़ा।
अब निगाहें अहमदाबाद पर
हाइड्रो में हुए समापन समारोह में भारत ने औपचारिक रूप से 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी संभाली। शंकर महादेवन और मानुषी छिल्लर की अगुवाई में लगभग 20 मिनट के सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज अहमदाबाद को सौंपा गया।
यह क्यों मायने रखता है
2030 की मेज़बानी भारत के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं है। राष्ट्रमंडल खेल आंदोलन खुद अपने अस्तित्व के सवालों से जूझ रहा है — मेज़बान मिलने में दिक्कत, बजट का दबाव और खेलों की घटती संख्या इसकी वजह हैं। ऐसे में अहमदाबाद 2030 इस बात की परीक्षा होगी कि भारत बड़े बहु-खेल आयोजन को किफायती और भरोसेमंद तरीके से करा सकता है या नहीं — और यही परीक्षा आगे चलकर ओलंपिक मेज़बानी की भारत की महत्वाकांक्षा का आधार बनेगी।
स्रोत: ओलंपिक्स डॉट कॉम, ओलंपिक्स डॉट कॉम (मुक्केबाजी रिपोर्ट), ईएसपीएन, बिज़नेस स्टैंडर्ड



