ईरान-अमेरिका तनाव फिर भड़का, कच्चा तेल 7% चढ़ा; भारत के आयात बिल और महंगाई पर मंडराया खतरा
बाज़ार में गिरावट क्यों
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव दोबारा भड़कने का सीधा असर भारतीय शेयर बाज़ार पर पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौता “खत्म” होने की घोषणा के बाद बिकवाली तेज़ हो गई। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2.15 प्रतिशत यानी करीब 1,677 अंक टूटा, जबकि व्यापक निफ्टी में भी 2.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल का झटका
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें 7 प्रतिशत से ज़्यादा उछल गईं। भारत के लिए यह बड़ी चिंता है, क्योंकि देश अपनी ज़रूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और रुपये पर दबाव पड़ता है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
तेल की ऊंची कीमतें भारत के राजकोषीय घाटे को चौड़ा कर सकती हैं और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लिए महंगाई पर काबू और विकास को सहारा देने के बीच संतुलन साधना मुश्किल बना सकती हैं। सबसे बड़ा जोखिम होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ा है — दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। अगर वहां आपूर्ति बाधित हुई, तो कीमतें और भड़क सकती हैं, जिससे ‘स्टैगफ्लेशन’ यानी सुस्त विकास और ऊंची महंगाई का ख़तरनाक मेल पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है।
आगे क्या देखना होगा
बाज़ार की चाल अब काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर टिकी है। पहले भी देखा गया है कि तेल का डर कम होते ही सूचकांक तेज़ी से वापसी करते हैं। निवेशकों के लिए फिलहाल सतर्कता ही सबसे बड़ी सलाह है। (यह लेख केवल सूचना के लिए है, निवेश सलाह नहीं।)
स्रोत: डेक्कन हेराल्ड, बिज़नेस स्टैंडर्ड, ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स



