ग्लासगो में सोमवार को भारत की पदक संख्या चार से बढ़कर दस पहुँच गई। पैरा एथलेटिक्स में 20 साल का इंतज़ार ख़त्म हुआ — और एक ही स्पर्धा में दो पदक आए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का चौथा दिन भारत के लिए अब तक का सबसे अच्छा दिन रहा। सोमवार को ग्लासगो में भारतीय दल ने छह पदक जोड़े और कुल संख्या चार से बढ़कर दस हो गई — दो स्वर्ण, पाँच रजत और तीन कांस्य।
लेकिन दिन की सबसे बड़ी कहानी पदकों की गिनती नहीं थी।
शर्मिला धनखड़ का ऐतिहासिक स्वर्ण
महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में शर्मिला धनखड़ ने 9.81 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।
यह जीत दो वजहों से ऐतिहासिक है। पहली — इसने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पैरा एथलेटिक्स पदक का 20 साल लंबा इंतज़ार ख़त्म किया। दूसरी — शर्मिला इन खेलों में भारत की पहली पैरा एथलेटिक्स स्वर्ण पदक विजेता बन गईं।
एक ही स्पर्धा में दो पदक
इसी शॉट पुट F57 स्पर्धा में शिल्पा के. श्यला ने कांस्य पदक हासिल किया। नाइजीरिया की यूचारिया इयाज़ी के अयोग्य घोषित होने के बाद शिल्पा पोडियम पर पहुँचीं।
इसके साथ ही भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार किसी एक पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में दो पदक जीते। यह आँकड़ा अकेले किसी एक खिलाड़ी की प्रतिभा से ज़्यादा तैयारी की गहराई की ओर इशारा करता है।
एथलेटिक्स में सर्वेश कुशारे का रजत
ट्रैक एंड फ़ील्ड में भारत का खाता सर्वेश कुशारे ने खोला। उन्होंने पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में रजत पदक जीता।
एथलेटिक्स कार्यक्रम सोमवार से ही शुरू हुआ था, और पहले ही दिन पदक मिलना भारतीय दल के लिए अच्छा संकेत है। हाई जंप फ़ाइनल में सर्वेश के अलावा तेजस्विन शंकर और जे. आदर्श राम भी उतरे थे।
भारोत्तोलन में लगातार दूसरा मज़बूत दिन
तीसरे दिन तीन पदक जीतने के बाद भारतीय भारोत्तोलकों ने सोमवार को भी क्रम जारी रखा:
- ज्ञानेश्वरी यादव — रजत, महिला 53 किग्रा
- वल्लुरी अजय बाबू — रजत, पुरुष 79 किग्रा
- बिंद्यारानी देवी सोरोखाइबम — कांस्य, महिला 58 किग्रा
भारोत्तोलन परंपरागत रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सबसे भरोसेमंद स्पर्धा रहा है, और ग्लासगो में भी वही तस्वीर बन रही है।
दिन के बाक़ी मुक़ाबले
चौथे दिन भारत के लिए मुरली श्रीशंकर और लोकेश सत्यनाथन लंबी कूद क्वालिफ़िकेशन में उतरे, गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर की हीट में हिस्सा लिया और तेजस शिर्षे 110 मीटर बाधा दौड़ में उतरे। मुक्केबाज़ी में सचिन सिवाच, अंकुश, साक्षी चौधरी और सुमित कुंडू के मुक़ाबले हुए, जबकि जिम्नास्टिक्स में प्रतिष्ठा सामंता महिला वॉल्ट फ़ाइनल में उतरीं। तैराकी में साजन प्रकाश और आर्यन नेहरा मैदान में रहे।
क्यों मायने रखता है
भारत का कॉमनवेल्थ पदक इतिहास लंबे समय से भारोत्तोलन, कुश्ती और निशानेबाज़ी जैसी चुनिंदा स्पर्धाओं पर टिका रहा है। इस लिहाज़ से ग्लासगो का चौथा दिन दो वजहों से अलग है — एथलेटिक्स में पदक, और पैरा एथलेटिक्स में पहली बार स्वर्ण।
पैरालंपिक स्तर पर भारत का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बेहतर हुआ है, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में यह उपलब्धि दो दशक बाद आई है। खेलों में अभी कई दिन बाक़ी हैं, और एथलेटिक्स के फ़ाइनल अब शुरू ही हुए हैं।
स्रोत: ईएसपीएन, ओलंपिक्स डॉट कॉम, आउटलुक इंडिया, बिज़नेस स्टैंडर्ड



