12 से ज्यादा कंपनियां अगले महीने बाजार में उतरेंगी। लेकिन इश्यू का आकार नहीं, उसका ढांचा बताता है कि पैसा कहां जा रहा है — कंपनी में या पुराने निवेशकों की जेब में।
भारत का प्राइमरी मार्केट अगस्त में साल के सबसे व्यस्त दौर से गुजरने जा रहा है। क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto, हाउसिंग फाइनेंस फर्म Truhome Finance और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म Shiprocket सहित एक दर्जन से ज्यादा कंपनियां अपने आईपीओ लाने की तैयारी में हैं। इन इश्यूज़ से कुल मिलाकर 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए जाने का अनुमान है।
2026 में अब तक 36 कंपनियां आईपीओ लेकर आ चुकी हैं, जिनमें नौ इसी महीने आईं।
पाइपलाइन में सबसे बड़े नाम
- Zepto — 8,010 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू, साथ में 11.34 करोड़ इक्विटी शेयर तक का ऑफर फॉर सेल (OFS)। यह अगस्त का सबसे बड़ा इश्यू होने की उम्मीद है।
- Truhome Finance — 3,000 करोड़ रुपये: 1,500 करोड़ फ्रेश इश्यू और 1,500 करोड़ OFS।
- Elevate Campuses — 2,550 करोड़ रुपये, पूरा फ्रेश इश्यू।
- Shiprocket — 2,342.35 करोड़ रुपये: 1,100 करोड़ तक फ्रेश इश्यू और 1,242.35 करोड़ OFS।
इनके अलावा Innovatiview India, Milky Mist Dairy Food, Dhoot Transmission, ARCIL, Ardee Industries, Gaja Alternative Asset Management, Rays of Belief, Hy-Tech Engineers, Shankesh Jewellers और Learnfluence Education भी कतार में हैं।
इससे पहले Manipal Health Enterprises 29 जुलाई और Juniper Green Energy 30 जुलाई को अपने इश्यू खोल रही हैं। MV Electrosystems का आईपीओ अगले हफ्ते आने की उम्मीद है।
वह लाइन जो सबसे ज्यादा मायने रखती है: फ्रेश इश्यू बनाम OFS
आईपीओ की खबरों में सबसे ज्यादा चर्चा इश्यू के कुल आकार की होती है। लेकिन निवेशक के लिहाज से ज्यादा अहम यह है कि उस रकम का बंटवारा कैसा है।
फ्रेश इश्यू में कंपनी नए शेयर जारी करती है और पैसा सीधे कंपनी के खाते में जाता है — विस्तार, कर्ज घटाने या कामकाजी पूंजी के लिए। यानी यह पैसा कारोबार में लगता है।
ऑफर फॉर सेल (OFS) में कोई नया शेयर नहीं बनता। मौजूदा शेयरधारक — प्रोमोटर, शुरुआती निवेशक, प्राइवेट इक्विटी फंड — अपने शेयर बेचते हैं। यह पैसा कंपनी को नहीं, बेचने वाले को मिलता है।
दोनों में कुछ गलत नहीं है; शुरुआती निवेशकों को कभी निकलना ही होता है। लेकिन अनुपात कहानी बदल देता है। Truhome का इश्यू आधा-आधा है। Elevate Campuses पूरी तरह फ्रेश इश्यू है — पूरा पैसा कंपनी में जाएगा। Shiprocket में OFS का हिस्सा फ्रेश इश्यू से बड़ा है।
Zepto के मामले में OFS शेयरों की संख्या में बताया गया है, रकम में नहीं — इसलिए उसका अंतिम आकार प्राइस बैंड तय होने पर ही साफ होगा। संदर्भ के लिए: बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का FY25 राजस्व 149% बढ़कर 11,110 करोड़ रुपये रहा।
अभी क्यों आ रही है यह बाढ़
इक्विरस कैपिटल में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के प्रमुख और एमडी भावेश शाह के मुताबिक बाजार की स्थितियां सुधरने के बाद वे कंपनियां लौट रही हैं जिन्होंने अपने आईपीओ टाल दिए थे। उनका अनुमान है कि इस कैलेंडर वर्ष में भारतीय कंपनियां आईपीओ के जरिये करीब 20 अरब डॉलर जुटा सकती हैं।
शाह ने एक अहम बात भी कही — जो इश्यू वाजिब कीमत पर आएंगे, उनका प्रदर्शन अच्छा रहने की संभावना है, जबकि आक्रामक कीमत वाले इश्यूज़ को निवेशकों की सतर्क प्रतिक्रिया झेलनी पड़ सकती है।
एक विरोधाभास जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
दिलचस्प बात यह है कि प्राइमरी मार्केट का यह उत्साह उस समय आ रहा है जब मैक्रो तस्वीर तनाव में है। हाल के हफ्तों में कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंचा और आरबीआई को रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचने पड़े।
इसका मतलब यह नहीं कि आईपीओ बाजार गलत है। इसका मतलब है कि दो अलग-अलग घड़ियां साथ चल रही हैं — कंपनियां लिस्टिंग के लिए खुली खिड़की का फायदा उठा रही हैं, जबकि करेंसी और कमोडिटी मोर्चे पर दबाव बना हुआ है। ऐसे दौर में लिस्टिंग के बाद का प्रदर्शन प्राइमरी सब्सक्रिप्शन के उत्साह से अलग रास्ता ले सकता है।
निवेशक किन बातों को देख सकते हैं
यह किसी शेयर की सिफारिश नहीं है, बल्कि आईपीओ दस्तावेज पढ़ने का एक ढांचा है:
- फ्रेश इश्यू और OFS का अनुपात — पैसा कंपनी में जा रहा है या बाहर।
- ‘ऑब्जेक्ट्स ऑफ द इश्यू’ — RHP में लिखा होता है कि जुटाई रकम किस काम में लगेगी।
- वैल्यूएशन की तुलना — उसी सेक्टर की लिस्टेड कंपनियों के मुकाबले।
- मुनाफे की स्थिति — तेज राजस्व वृद्धि और मुनाफा दो अलग चीजें हैं; क्विक कॉमर्स जैसे सेक्टर में यह फर्क बड़ा होता है।
- एंकर और लॉक-इन — लॉक-इन खत्म होने के बाद शेयर की सप्लाई बढ़ सकती है।
क्यों मायने रखता है
एक महीने में 25,000 करोड़ रुपये का इश्यू आकार बताता है कि कंपनियों को पूंजी जुटाने के लिए खिड़की खुली दिख रही है। रिटेल निवेशक के लिए असली सवाल आकार नहीं, ढांचा और कीमत है। और वह जानकारी विज्ञापन में नहीं, रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में मिलती है।
अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक है और किसी निवेश की सलाह नहीं है। निवेश से पहले आधिकारिक ऑफर दस्तावेज पढ़ें और आवश्यकता हो तो सेबी-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श करें।
स्रोत: फ्री प्रेस जर्नल, फ्री प्रेस जर्नल, बिजनेस स्टैंडर्ड, बिजनेस स्टैंडर्ड



